Lecture – 12

CategoriesIndian polity

संघ एवं इसका क्षेत्र

1956 के बाद बनाए गए नए एवं संघ शासित क्षेत्र

1956 में व्यापक स्तर पर राज्यों को पुनर्गठन के बावजूद भारत के राजनीतिक मानचित्र में व्यापक विभेदता व राजनीतिक दबाव के चलते परिवर्तन की आवश्यकता महसूस की गई। भाषा या सांस्कृतिक एकरूपता एवं अन्य कारणों के चलते दूसरे राज्यों से अन्य राज्यों के निर्माण की मांग उठी।

महाराष्ट्र और गुजरात

1960 में द्विभाषा राज्य बंबई को दो पृथक राज्यों में विभक्त किया गया- महाराष्ट्र मराठी भाषी लोगों के लिए एवं गुजरात गुजराती भाषी लोगों के लिए। गुजरात भारतीय संग का 15वां राज्य था।

दादर एवं नादर हवेली

1954 में इसके स्वतंत्र होने से पूर्व यहां पु्र्तगाल का शासन था। 1961 तक यहां लोगों द्वारा स्वयं चुना गया। प्रशासन चलता रहा। 10वें संविधान संशोधन अधिनियम 1961 द्वारा इसे संघ शासित क्षेत्र में परिवर्तित कर दिया गया।

गोवा, दमन एवं दीव

1961 में पुलिस कार्यवाही के माध्यम से भारत में इन तीन क्षेत्रों को अधीगृहीत किया गया, 12वें संविधान संशोधन अधिनियम, 1962 के द्वारा इन्हें संघ शासित क्षेत्र के रूप में स्थापित किया गया। बाद में 1987 में गोवा को एक पूर्ण राज्य बना दिया गया। इसी तरह दमन और दीव को पृथक केंद्रशासित प्रदेश बना दिया गया।

पुडुचेरी

पुडुचेरी का क्षेत्र पूर्व फ्रांसीसी गठन का स्वरूप था, जिसे भारत में पुडुचेरे, कराइकल, माहे और यनम के रूप में जाना गया। 1954  में फ्रांस ने इसे भारत के सुपुर्द कर दिया। इस तरह 1962 तक इसका प्रशासन ‘अधिगृहीत क्षेत्र’ की तरह चलता रहा। फिर इसे 14वें संविधान संशोधन अधिनियम द्वारा संघ शासित प्रदेश बनाया गया।

नागालैंड .

1963 में नागा पहाड़ियों और असम के बाहर के त्वेनसांग क्षेत्रों को मिलाकर नागालैंड राज्य का गठन किया गया। ऐसा नगा आंदोलनकारियों की संतुष्टि के लिए किया गया था। तथापि, नागालैंड को भारतीय संघ के 16वें राज्य का दर्जा देने से पूर्व 1961 में के राज्यपाल के नियंत्रण में रखा गया था।

हरियाणा, चंडीगढ़ और हिमाचल प्रदेश

1966 में पंजाब राज्य से भारतीय संघ के 17वें राज्य हरियाणा और केंद्रशासित प्रदेश चंडीगढ़ का गठन किया गया। इसके बाद सिखों के लिए पृथक् ‘सिंह गृह राज्य’ (पंजाब सूबा) की मांग उठने लगी। यह मांग अकाली दल नेता मास्टर तारा सिंह के नेतृत्व में उठी। शाह आयोग (1966) की सिफारिश पर पंजाबी भाषी क्षेत्र को पंजाब राज्य एवं हिंदी भाषी क्षेत्र को हरियाणा राज्य के रूप में स्थापित किया गया एवं इससे लगे पहाड़ी क्षेत्र को केंद्र शासित राज्य हिमाचल प्रदेश का रूप दिया गया। 1971 में संघ शासित क्षेत्र हिमाचल प्रदेश को पूर्ण राज् य का दर्जा दिया गया (भारतीय संघ का 18वां राज्य)।

मणिपुर, त्रिपुरा एवं मेघालय

1972 में पूर्वोत्तर भारत के राजनीतिक मानचित्र में व्यापक परिवर्तन आए। इस तरह दो केंद्र शासित प्रदेश मणिपुर व त्रिपुरा एवं उपराज्य मेघालय को राज्य का दर्जा मिला। इसके अलावा दो संघ शासित प्रदेशों मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश (मूलतः जिसे पूर्वोच्चर सीमांत एजेंसी ‘NEFA’ के नाम से जाना जाता है) भी अस्तित्व में आए। इसके साथ ही भारतीय संघ में राज्यों की संख्या 21 हो गई (मणिपुर 19वां त्रिपुरा 20वां और मेघालय 21)।

22वें संविधान संशोधन अधिनियम (1969) के द्वारा मेघालय को ‘स्वायत्तशासी राज्य’ बनाया गया। यह असम में उपराज्य के रूप में भी जाना जाता था, इसका अपना मंत्रिपरिषद था। यद्यपि यह मेघालय के लोगों की महत्वाकांक्षा की पूर्ति नहीं कर पाया। मिजोरम एवं अरुणाचल प्रदेश संघ शासित प्रदेशों को असम क्षेत्र से पृथक् किया गया।

सिक्किम

1947 तक सिक्किम भारत का एक शाही राज्य था, जहां चोग्याल का शासन था। 1947 में ब्रिटिश शासन के समाप्त होने पर सिक्किम को भारत द्वारा रक्षित किया गया। भारत सरकार ने इसके रक्षा, विदेश मामले एवं संचार का उत्तरदायित्व लिया। 1974 में सिक्किम ने भारत के प्रति अपनी इच्छा दर्शायी। तद्नुसार, संसद दावारा 35वां संविधान संशोधन अधिनियम (1974) लागू किया गया। इसके द्वारा सिक्किम को एक ‘संबद्ध राज्य’ का दर्जा दिया गया। इस उद्देश्य के लिए एक नये अनुच्छेद  2क  एवं  नयी  अनुसूची  (दसवीं  अनुसूची, जिसमें संबद्धता की शर्ते एवं नियम उल्लिखित किए गए) को संविधान में जोड़ा गया। हालांकि यह प्रयोग अधिक नहीं चला। इससे सिक्किम के लोगों की महत्वाकांक्षाओं की पूर्ती नहीं हुई। 1975 में एक जनमत के दौरान उन्होंने चोग्याल के शासन को समाप्त करने के लिए मत दिया। इस तरह सिक्किम भारत का एक अभिन्न हिस्सा बन गाय। इसी तरह 36 वें संविधान संशोधन अधिनियम (1975) के प्रभावी होने के बाद सिक्किम को भारतीय संघ का पूर्ण राज्य बना दिया गया (22वां राज्य)।

इस संशोधन के माध्यम से संविधान की पहली व चौथी अनुसूची को संशोधित कर नया अनुच्छेद 371-च को जोड़ा गया। इसमें सिक्किम के प्रशासन के लिए कुछ विशेष प्रावधानों की व्यवस्था की गई। इसने अनुच्छेद 2क और दसवीं अनुसूची को भी निरसित कर दिया, जिन्हें 1974 के 35वें संशोधन अधिनियम द्वारा जोड़ा गया था।

मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और गोवा

1987 में भारतीय संघ में तीन नये राज्य मिजोरम, अरुणाचल प्रदेश और गोवा 23वें, 24वें, व 25वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आये। संघशासित प्रदेश मिजोसम को पूर्ण राज्य बनाया गया। यह निर्माण 1986 में एक समझौता के आधार पर हुआ, जिस पर भारत सरकार एवं मिजो नेशनल फ्रंट ने हस्ताक्षर किये। जिसने दो दशक से चले आ रहे राजद्रोह को समाप्त किया। अरुणाचल पर्देश भी 1972 में संघशासित प्रदेश बना। संघशासित प्रदेश गोवा, दमन और दीव से गोवा को पृथक कर अलग राज्य बनाया गया।

छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड

सन 2000 में छत्तीसगढ़, उत्तराखंड और झारखंड को क्रमशः मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और बिहार से पृथक कर नये राज्यों के रूप में मान्यता दी गयी। ये तीनों राज्य, भारतीय संघ के 26वें, 27वें व 28वें राज्य बने।

तेलंगाना

वर्ष 2014 में तेलंगाना राज्य आन्ध्र प्रदेश राज्य के भूभाग को काटकर भारत के 20वें राज्य के रूप में अस्तित्व में आया। आन्ध्र प्रदेश राज्य अधिनियम 1953 नें भारत में भाषा के आधार पर पहले राज्य का निर्माण किया – आन्ध्र प्रदेश, जिसमें मद्रास राज्य (तमिलनाडु) के तेलुगु भाषी क्षेत्र शामिल किए गए। कुरनुल आन्ध्र प्रदेश राज्य की राजधानी थी जबकि गुंडुर में राज्य का उच्च न्यायालय स्थापित था।

राज्य पुनर्गठन अधिनियम 1956 द्वारा हैदराबाद राज्य के तेलुगू भाषी क्षेत्रों को आन्ध्र राज्य में मिलाकर वह बृहततर आन्ध्र प्रदेस राज्य की स्थापना की गई। राज्य की राजधानी हैदराबाद स्थांतरित की गई। oपुनः आन्ध्र प्रदेश पुनर्गठन अधिनियम 2014 ने आन्ध्र प्रदेश को अलग राज्यों में बांट दिया : आन्ध्र प्रदेश (शेष) तथा तेलंगाना। हैदराबाद को दोनों राज्यों की संयुक्त राजधानी बनाया गया है। 10 वर्षों के लिए अवधि में आन्ध्र प्रदेश अपनी अलग राजधानी बना लेगा। इसी प्रकार आन्ध्र प्रदेश उच्च न्यायालय का नाम बदलकर  हैदराबाद  उच्च न्यायालय  कर दिया  गया है।  उच्च न्यायालय तब तक दोनों राज्यों के लिए साझा रहेगा जब तक कि आन्ध्र प्रदेश राज्य के लिए अलग उच्च न्यायालय स्थापित नहीं हो जाता।

इस प्रकार राज्यों और संघशासित क्षेत्रों की संख्या 1956 में क्रमशः 14 एवं 6 से बढ़कर 2014 में क्रमशः 29 तथा 7 हो गई है।

नामों में परिवर्तन

कुछ राज्यों एवं संघशासित क्षेत्रों के नामों में भी परिवर्तन किया गया। संयुक्त प्रांत पहला राज्य था जिसका नाम परिवर्तित किया गया। इसका नया नाम 1950 में उत्तर प्रदेश किया गया। 1969 में मद्रास का नया नाम तमिलनाडु रखा गया। इसी तरह 1973 में मैसूर का नया नाम कर्नाटक रखा गया। इसी वर्ष लकादीव मिनिकॉय एवं अमीनदीवी का नया नाम लक्षद्वीप रखा गया। 1972 में संघशासित प्रदेश दिल्ली का नया नाम राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली रखा गया (इसे बिना पूर्ण राज्य का दर्जा दिए)।

यह बदलाव 69वें संविधान संशोधन अधिनियम 1991 के द्वारा हुआ। वर्ष 2006 में उत्तरांचल का नाम बदलकर उत्तराखंड कर दिया गया। इसी वर्ष पांडिचेरी का नाम बदलकर पुडुचेरी किया गया। वर्ष 2011 में उड़ीसा का पुनःनामकरण ‘ओडिशा’ के रूप में हुआ।

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