24-10-2019 PIB NEWS ANALYSIS

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राष्ट्रपति कल राजगीर में विश् शांति स्तूप के स्वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करेंगे

राष्‍ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद कल (25 अक्‍टूबर, 2019) बिहार का दौरा करेंगे और राजगीर में विश्‍व शांति स्‍तूप के स्‍वर्ण जयंती समारोह को संबोधित करेंगे।

भारत ने विश्व बैंक केकारोबार में सुगमतासूचकांक में 14 पायदानों की ऊंची छलांग लगाई

विश्व बैंक की ‘कारोबार में सुगमता’ रिपोर्ट में भारत अब और ऊपर चढ़कर 63वें पायदान पर पहुंच गया है

विश्व बैंक ने आज यानी 24 अक्टूबर को ‘कारोबार में सुगमता’ पर अपनी नवीनतम रिपोर्ट (डीबीआर, 2020) जारी की। भारत ने विश्व बैंक के ‘कारोबार में सुगमता’ सूचकांक में 14 पायदानों की ऊंची छलांग लगाई है। विश्व बैंक ने कुल मिलाकर 190 देशों में ‘कारोबार में सुगमता’ का आकलन किया। भारत वर्ष 2019 में इस दृष्टि से 190 देशों की सूची में 77वें पायदान पर था, जबकि अब भारत और ऊपर चढ़कर 63वें पायदान पर पहुंच गया है। ‘कारोबार में सुगमता’ सूचकांक में भारत द्वारा लगाई गई 14 पायदानों की ऊंची छलांग इस दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है कि वर्ष 2015 से ही इस मोर्चे पर निरन्तर सुधार देखा जा रहा है। यही नहीं, ‘कारोबार में  और अधिक सुगमता’ सुनिश्चित करने वाले शीर्ष 10 देशों में भारत लगातार तीसरे वर्ष अपने-आपको शुमार करने में सफल रहा है। सरकार के निरन्तर प्रयासों के परिणामस्वरूप भारत पिछले 5 वर्षों (2014-19) में ‘कारोबार में सुगमता’ सूचकांक में अपनी रैंकिंग में 79 पायदानों का उल्लेखनीय सुधार करने में सफल रहा है।

      ‘डूइंग बिजनेस’ आकलन के तहत उन 10 पैमानों पर 190 अर्थव्यवस्थाओं में विभिन्न कारोबारी नियम-कायदे बनाने और उन्हें लागू किये जाने पर गौर किया जाता है जो किसी भी व्यवसाय या बिजनेस को उसकी समूची कारोबारी अवधि के दौरान प्रभावित करते हैं। डूइंग बिजनेस रिपोर्ट (डीबीआर) के तहत ‘डिस्टैंस टू फ्रंटियर (डीटीएफ)’ के आधार पर विभिन्न देशों की रैंकिंग की जाती है। यह दरअसल एक ऐसा स्कोर है जो सर्वोत्तम वैश्विक प्रथा के सापेक्ष किसी भी अर्थव्यवस्था में मौजूद  अंतर या खाई को दर्शाता है। भारत का डीटीएफ स्कोर पिछले वर्ष के 67.23 से बेहतर होकर इस वर्ष 71.0 के स्तर पर पहुंच गया है।

      भारत कुल 10 संकेतकों में से 7 संकेतकों में अपनी रैंकिंग बेहतर करने में कामयाब रहा है। इसके साथ ही भारत सर्वोत्तम अंतर्राष्ट्रीय प्रथाओं या तौर-तरीकों (डिस्टैंस टू फ्रंटियर स्कोर) को अपनाने के मामले में इनके और करीब पहुंच गया है। भारत ने ‘दिवालियेपन का समाधान करना’, ‘निर्माण परमिट’, ‘संपत्ति के पंजीकरण’, ‘सीमा पार व्यापार’ और ‘करों की अदायगी’ से जुड़े संकेतकों में उल्लेखनीय सुधार दर्शाया है। भारत ने जिन 7 संकेतकों में अपनी रैंकिंग बेहतर की है उनका उल्लेख नीचे किया गया हैः 

क्र.सं. संकेतक 2018 2019 बदलाव
1 दिवालियेपन का समाधान करना 108 52 +56
2 निर्माण परमिट 52 27 +25
3 सीमा पार व्यापार 80 68 +12
4 संपत्ति का पंजीकरण 166 154 +12
5 करों की अदायगी 121 115 +6
6 बिजली कनेक्शन पाना 24 22 +2
7 कोई कारोबार शुरू करना 137 136 +1
समग्र रैंक 77 63 +14

ओडिशा में 1,25,000 छोटे किसानों को जलवायु परिवर्तन रोधी कृषि में मदद के लिए विश्व बैंक की नई परियोजना

भारत सरकार, ओडिशा सरकार और विश्व बैंक ने छोटे किसानों की उत्पादन प्रणालियों को सुदृढ़ करने के साथ-साथ आमदनी बढ़ाने के लिए उनकी उपज में विविधता लाने तथा बेहतर ढंग से विपणन (मार्केटिंग) में उनकी मदद करने के लिए आज 165 मिलियन अमेरिकी डॉलर के ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किये।

जलवायु परिवर्तन रोधी कृषि के लिए ओडिशा एकीकृत सिंचाई परियोजना को उन ग्रामीण क्षेत्रों में लागू किया जाएगा जहां बार-बार सूखा पड़ने का खतरा रहता है और जो काफी हद तक वर्षा आधारित कृषि पर ही निर्भर रहते हैं। इससे ओडिशा के 15 जिलों के लगभग 1,25,000 छोटे किसान परिवार लाभान्वित होंगे जो 1,28,000 हेक्टेयर कृषि भूमि का प्रबंधन करते हैं। यह परियोजना जलवायु परिवर्तन रोधी बीजों की विभिन्न किस्मों तथा उत्पादन तकनीकों तक छोटे किसानों की पहुंच बढ़ाकर, जलवायु परिवर्तन रोधी फसलों की ओर उऩ्हें उन्मुख कर तथा बेहतर जल प्रबंधन एवं सिंचाई परियोजनाओं तक उनकी पहुंच सुनिश्चित कर प्रतिकूल जलवायु से निपटने में उन्हें सक्षम बनाएगी।

वित्त मंत्रालय के आर्थिक मामलों के विभाग में अपर सचिव श्री समीर कुमार खरे ने कहा, ‘भारत सरकार जलवायु परिवर्तन पर राष्ट्रीय कार्य योजना के तहत अनेक मिशन कार्यान्वित कर रही है जिनके तहत जलवायु परिवर्तन से निपटने में सक्षम बेहतरीन कृषि प्रथाओं और प्रौद्योगिकियों को भी अपनाया जाता है।’ उन्होंने कहा, ‘वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) के तहत टिकाऊ कृषि संबंधी लक्ष्यों की प्राप्ति की हमारी प्रतिबद्धता के अनुरूप सरकार से समर्थन प्राप्त इस तरह की कई पहलों में ओडिशा की परियोजना भी शामिल है।’

भारत सरकार की ओर से आर्थिक मामलों के विभाग में अपर सचिव श्री समीर कुमार खरे और ओडिशा सरकार की ओर से जल संसाधन विभाग में प्रधान सचिव श्री सुरेन्द्र कुमार तथा विश्व बैंक की ओर से कंट्री डायरेक्टर (भारत) श्री जुनैद अहमद ने उपर्युक्त ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किये।

हाल के वर्षों में जलवायु में व्यापक परिवर्तन ने ओडिशा में कृषि को बुरी तरह प्रभावित किया है। ओडिशा में ज्यादातर किसान ऐसे हैं जिनके पास दो हेक्टेयर से भी कम भूमि है। यही नहीं, ओडिशा में ज्यादातर कृषि क्षेत्रों पर खराब मौसम की मार अक्सर पड़ती रहती है। वर्ष 2009 से ओडिशा में सूखा पड़ने की स्थिति गंभीर हो गई है क्योंकि पहले जहां हर पांच वर्षों में सूखा पड़ता था, वहीं अब हर दो वर्षों में ही सूखा पड़ जाता है।

अंतर्राष्ट्रीय पुनर्निर्माण एवं विकास बैंक (आईबीआरडी) से मिलने वाले 165 मिलियन डॉलर के ऋण के तहत छह वर्षों की मोहलत अवधि है और इसकी परिपक्वता अवधि 24 वर्ष है।

चेनानी नशरी सुरंग का नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग

डॉ. मुखर्जी को यही सच्ची श्रद्धांजलि : श्री नितिन गडकरी

श्री जितेन्द्र सिंह ने इसे भारतीय इतिहास का एक अनोखा क्षण बताया

दिल्ली और कटरा के बीच नए सड़क संपर्क की घोषणा

            केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा एमएसएमई मंत्री श्री नितिन गडकरी और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास, प्रधानमंत्री कार्यालय, जन शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में जम्मू और कश्मीर में एनएच-44 पर स्थित चेनानी नशरी सुरंग का नाम बदलकर डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग करने की घोषणा की। 9 किलोमीटर की यह सुरंग देश की सबसे लंबी आधुनिक सुरंग है, जो उधमपुर को जम्मू में रामबन से जोड़ती है। 2500 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस सुरंग के कारण यात्रा का मार्ग 31 किलोमीटर और दोनों जगहों के बीच यात्रा का समय करीब दो घंटे कम कर हो गया है जिससे ईंधन की काफी बचत होगी।

केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा एमएसएमई मंत्री श्री नितिन गडकरी और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकासप्रधानमंत्री कार्यालयजन शिकायत और पेंशनपरमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेन्द्र सिंह ने आज नई दिल्ली में आयोजित एक साधारण समारोह में जम्मू और कश्मीर में एनएच44 पर स्थित चेनानी नशरी सुरंग का नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग करने की घोषणा की।

इस अवसर पर श्री गडकरी ने कहा कि सुरंग का नया नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को सच्ची श्रद्धांजलि होगी, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दी और वह राष्ट्र के लिए प्रेरणा स्रोत रहे। जम्मू और कश्मीर राज्य में उनके मंत्रालय की पहल के बारे में श्री गडकरी ने कहा कि पिछले पांच वर्षों के दौरान राज्य में 6000 करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं का काम शुरू किया गया है। इनमें जम्मू और श्रीनगर के आसपास रिंग रोड और जोजिला सुरंग का निर्माण शामिल है। उन्होंने कहा कि यह परियोजनाएं राज्य की जनता के लिए बड़ा परिवर्तन साबित होंगी, जिनसे रोजगार मिलेगा और सामाजिक-आर्थिक विकास होगा।

श्री गडकरी ने दिल्ली और जम्मू में कटरा के बीच नए सड़क संपर्क के निर्माण की घोषणा की जिससे यात्रा का समय 6 घंटे तक कम हो जाएगा। उन्होंने कहा कि नया सड़क संपर्क हरियाणा और पंजाब राज्यों से होकर गुजरेगा। श्री गडकरी ने कहा कि सरकार हथकरघा, हस्तशिल्प, शहद आधारित उद्योगों जैसे मध्यम और लघु उद्योगों के जरिए राज्य में रोजगार सृजन के अवसर बढ़ाने की नीति पर कार्य कर रही है।   

एनएच-44 पर चेनानी नशरी सुरंग का नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सुरंग रखने के अवसर पर केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग तथा एमएसएमई मंत्री श्री नितिन गडकरी नई दिल्ली में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए।

इस अवसर पर डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि देश के लिए यह एक अनोखा क्षण है। 66 वर्ष पूर्व डॉ. मुखर्जी को गैर-कानूनी तरीके से लखनपुर से गिरफ्तार कर लिया गया था और उन्हें चेनानी नशरी के जरिए श्रीनगर ले जाया गया। डॉ. मुखर्जी उस समय लोकसभा के सदस्य थे। इस सुरंग का नाम डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर रखने के बाद यह उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि होगी और आने वाले पीढ़ियां भविष्य में इस दिन को याद रखेंगी। उन्होंने कहा कि यह कामगारों के संघर्ष को श्रद्धांजलि है और डॉ. मुखर्जी के ‘एक विधान, एक निशान, एक प्रधान’ के संकल्प को पूरा करता है। उन्होंने कहा कि नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के अंतर्गत क्षेत्र का काफी विकास हुआ है। उधमपुर में करीब 2 दर्जन पुलों का निर्माण हुआ है। कुछ अंतरराज्यीय पुलों और आधुनिक सुरंगों का निर्माण हुआ है।

स्रोत – PIB

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